राजधानी-शताब्दी ट्रेन के सुविधा मे सुधार, हर कोच में मिलेंगी अब ये विशेष सुविधाएं

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और एडवांस होने की राह पर राजधानी-शताब्दी ट्रेन, हर कोच में मिलेंगी अब ये विशेष सुविधाएं

  • रेलगाड़ियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए रेलवे मंत्रालय ने ‘परियोजना स्वर्ण’ शुरू की है. इस परियोजना के तहत पहले चरण में 14 राजधानी और 15 शताब्दी ट्रेनों की सुविधा में सुधार कर उन्हें सुरक्षा तथा सुविधा के नजरिए से बेहद आधुनिक बनाया गया है.

 

  • इस कार्यक्रम के लिए मंत्रालय ने 9 टीमें बनाई हैं. हर टीम में रेलवे बोर्ड के दो अधिकारी शामिल हैं. इस परियोजना के तहत राजधानी एक्सप्रेस की पहली अपडेट रेक सियालदह राजधानी (12314 नई दिल्ली-सियालदह) गाड़ी है, जिसे एक दिसंबर को नई दिल्ली से शुरू किया गया.

 

  • गाड़ियों में यात्री अनुभव में सुधार के लिए एक विस्तृत कार्यक्रम बनाकर 10 बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इनमें कोच के अंदर की दशा, प्रसाधन (टायलेट-बाथरूम), कोच की सफाई, समय की पाबंदी, खान-पान, बिस्तर, स्टाफ का व्यवहार, सुरक्षा, कोच के अंदर मनोरंजन सुविधा और रीयल टाइम फ़ीडबैक शामिल हैं.

 

  • शौचालयों में ‘ऑटो जेनिटर’ के जरिए बेहतर साफ-सफाई उपलब्ध कराई गई है. शौचालयों में अतिरिक्त मैट रखे गए हैं और सफाई के लिए शुष्क शौचालय की व्यवस्था है. गंधहीन कमोड और बेसिन लगाए गए हैं और उन पर पॉलिश की गई है. बेहतर वॉश बेसिन लगाये गए हैं. यहां आपको हर समय साबुन मिलेगा. इसके अलावा बेहतर डस्टबिन भी रखे गए हैं. टॉयलेट में गीजर, गर्म और ठंडा पानी को मिक्स करने वाले डिस्पेंसर लगाए गए हैं.

 

  • कोच को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय रंगों से पेंट किया गया है और एलईडी प्रकाश व्यवस्था की गयी है. बर्थ नंबर और अन्य सुविधा देने के लिए अंधेरे में देखे जाने इंडिकेटर लगाए गए हैं. दर्पणों के ऊपर एलईडी लाईट लगाई गई है. कोच के फर्श को भी अधिक चमकदार बनाया गया है.

 

  • फर्स्ट एसी डिब्बे के यात्रियों के लिए दो अलग-अलग रंग के कंबल मिलेंगे. साथ ही अप और डाउन गाड़ियों में भी अलग-अलग रंग के कंबल होंगे. ऊपर की बर्थ पर आसानी से पहुंचने के लिए सीढ़ी लगाई गई है. पत्रिका रखने के बैगों को नए डिजाईन में बनाया गया है और उसमें मोबाईल फोन रखने के लिए अलग से इंतजाम किया गया है.

 

  • दरवाजों और बर्थ के आस-पास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. यात्रियों का फीडबैक जानने के लिए तीन पायलट कोच सेवा में हैं. इस रेक को विकसित करने के लिए 35 लाख रुपये का खर्च आया है. इस तरह प्रति कोच 2 लाख रुपये से कम की लागत आई है.

Ref:-zeenews.india.com

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