सचिन तेंदुलकर के संन्यास के बाद अब खत्म हुई ‘ 10 नंबर जर्सी’ की कहानी

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सचिन के संन्यास के पांच साल बाद (2012 में वनडे से संन्यास) अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने सचिन तेंदुलकर के खास जर्सी नंबर 10 को अनाधिकारिक रुप से हटा लिया है.

नई दिल्ली: विश्व क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक भारत के सचिन तेंदुलकर ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की थी तब हर किसी ने कहा था सचिन के साथ उनकी जर्सी नंबर 10 भी आज संन्यास ले रही है. सचिन के संन्यास के पांच साल बाद (2012 में वनडे से संन्यास) अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने सचिन के खास जर्सी नंबर 10 को अनाधिकारिक रुप से हटा लिया है. अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोई भी खिलाड़ी जर्सी नंबर 10 के साथ मैदान पर नहीं उतर पाएगा.

किस-किस जर्सी में उतरे सचिन

सचिन ने अपने 463 वनडे मुकाबले में कुल तीन जर्सी नंबर के साथ मैदान पर उतरे लेकिन उनकी पहचान नंबर 10 से ही हुई. सचिन ने सबसे पहले अपना जर्सी नंबर 99 रखा था, जो कि दो अंकों की सबसे बड़ी संख्या है. 99 के बाद सचिन जर्सी नंबर 33 के साथ उतरे. ये वो वक्त था जब वो टेनिस एल्बो के इलाज के बाद टीम में वापसी कर रहे थे. इसके बाद सचिन नंबर 10 की जर्सी में मैदान पर उतरे और अंत तक इसी जर्सी के साथ खेले.

मुंबई इंडियंस ने भी किया था रिटायर

बीसीसीआई से पहले आईपीएल की सबसे बेहतरीन टीम मुंबई इंडियंस ने जर्सी नंबर 10 को रिटायर किया था. 2013 में सचिन आखिरी बार आईपीएल खेलने उतरे थे और मुंबई पहली बार चैंपियन बनी थी. सचिन के संन्यास के बाद मुंबई इंडियंस ने जर्सी नंबर 10 को भी रिटायर कर दिया.

बुरे फंसे थे शार्दुल ठाकुर

सचिन के संन्यास के बाद जर्सी नंबर 10 में कोई भारतीय खिलाड़ी मैदान पर उतरा तो वो थे मुंबई के तेज गेंदबाज शार्दुल ठाकुर. अपने डेब्यू मैच में उन्होंने जर्सी नंबर 10 पहना था. ठाकुर इसे अपने जन्मदिन और लकी नंबर से जोड़ा था लेकिन फैंस से वो बच नहीं पाए और जमकर ट्रोल किए गए. उसके बाद उन्होंने इस नंबर से तौबा कर ली और बदले हुए जर्सी नंबर के साथ मैदान पर उतरे.

जर्सी नंबर 10 का महत्व

खेल की दुनिया में जर्सी नंबर 10 का महत्व सबसे ज्यादा है. एक तरफ जहां ये पहला दहाई का नंबर है वहीं टीम के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी को ये नंबर दी जाती है. इसे पहनने वाले खिलाड़ी पर टीम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है फिर चाहे बात मैदान की हो या मैदान के बाहर की. (10 – 1+0 = 1) इस सिद्धांत के साथ इसे सर्वोच्च माना जाता है, साथ ही ये नेतृत्व,जीत और शक्ति का भी परिचायक है.

Ref:-abpnews.abplive.in

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