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न्यू दिल्ली/भारत:- 16 दिसंबर 2012 की रात पांच दरिंदों ने 23 वर्षीय निर्भया के साथ क्रूरतम तरीके से गैंग रेप किया था इसके बाद इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए कई योजनाएं बनीं, पैसा आया और प्रदर्शन हुए. इस घटना के पांच साल बीतने के बाद भी क्या देश में महिलाएं सुरक्षित हुई हैं|राष्ट्रीय राजधानी महिलाओं के लिए सुरक्षित है या नहीं? महिला सुरक्षा के नाम पर जारी हो रहे फंड का क्या हो रहा है? आंकड़े बताते हैं कि न तो महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हुए हैं और न निर्भया फंड का सही उपयोग हो रहा है और न तो ‘निर्भीक गन’ महिलाओं के काम आ रही है.

निर्भया के साथ दरिंदगी बस में हुई थी. इसलिए दिल्‍ली सरकार ने डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही थी लेकिन उसका क्या हुआ किसी को पता नहीं| उधर, रेल मंत्रालय अगले दो साल में निर्भया फंड से  रेलवे स्‍टेशनों पर करीब 35 हजार सीसीटीवी कैमरे  लगवाएगा. ताकि अपराध रोकने में मदद मिल सके. इस प्रोजेक्‍ट पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे.निर्भया गैंग रेप की घटना ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी. कानपुर फील्ड गन फैक्ट्री में महिलाओं की आत्मरक्षा के लिए साइज में छोटी और वजन में हल्की रिवॉल्‍वर बनाई गई. निर्भया के नाम पर इसका नाम भी ‘निर्भीक गन’ रखा गया. लांचिंग समारोह में ही भेदभाव शुरू हो गया. 10 में से तीन रिवॉल्‍वर महिलाओं को तो 7 रिवॉल्‍वर पुरुषों को दी गईं. इसका वजन सिर्फ वजन 530 ग्राम है, लेकिन कीमत 1.26 लाख रुपये है. भला इसे कितनी महिलाएं खरीद पाएंगी. अब तक सिर्फ पांच हजार गन बिकी है.

 

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