Chanakya नीति(Part-2)

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chanakya niti
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Chanakya Niti-2:-

  1. सकुले योजयेत्कन्या पुत्रं पुत्रं विद्यासु योजयेत्। व्यसने योजयेच्छत्रुं मित्रं धर्मे नियोजयेत् ॥
Hindi Meaning:

कन्या का विवाह किसी अच्छे घर में करने से अच्छा होता है, पुत्र को पढ़ाई-लिखाई में लगा देना चाहिए, मित्र को अच्छे कार्यो में लगाना तथा शत्रु को बुराइयों में लगा देना चाहिए । यही व्यवहारिकता है और समय की मांग भी होती है

2) दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः। सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे ॥

Hindi Meaning:

दुष्ट आदमी और साँप, इन दोनों में साँप अच्छा है, न कि दुष्ट आदमी। साँप तो एक ही बार डसता है, किन्तु दुष्ट आदमी तो मौका पर डसता रहता है ।

3) एतदर्थ कुलीनानां नृपाः कुर्वन्ति संग्रहम्। आदिमध्यावसानेषु न त्यजन्ति च ते नृपम् ॥

Hindi Meaning:

उत्तम कुल या खानदानी लोग आरम्भ से अन्त तक साथ नहीं छोड़ते । वे वास्तव में संगति का धर्म निभाते हैं । इसलिए राजा लोग कुलीन का संग्रह करते हैं ताकि समय-समय पर सत्परामर्श मिल सके ।

4) वरयेत्कुलजां प्राज्ञो निरूपामपि कन्यकाम्। रूपवतीं न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले ॥

Hindi Meaning:

बुद्धिमान मनुष्य को चाहिए कि वह रूपवती या सुंदर न होने पर भी कुलीन कन्या से विवाह कर ले, किन्तु नीच कुल की कन्या यदि रूपवती तथा सुशील भी हो, तो उससे विवाह न करे । क्योँकि विवाह समान कुल में ही करनी चाहिए ।

5) यो ध्रुवाणि परित्यज्य ह्यध्रुवं परिसेवते। ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव तत् ॥

Hindi Meaning:

जो निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का सहारा लेता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है ।अनिश्चित तो स्वयं ही नष्ट होता है

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Chanakya Niti2

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