ये 7 बड़े अंतर जानें HIV और AIDS में

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अगर आपको ये बताया जाए कि किसी को एचआईवी है, एड्स नहीं तो, आपका क्या रिएक्शन होगा? इसलिए एड्स और एचआईवी के बीच के अंतर को इस स्लाइड शो में समझें।

एचआईवी और एड्स में अंतर

एचआईवी और एड्स को लेकर ऐसे ही समाज में बहुत सारे भ्रम फैले हुए हैं। इनका नाम सुनने के साथ ही लोग इस बीमारी से ग्रस्‍त इंसान के साथ बैठना, खाना-पीना और रहना बंद कर देते हैं। ऐसे में इन दोनों के बारे में औऱ इन दोनों के बीच के अंतर के बारे में लोगों को जानना बहुत जरूरी है। यहां इन दोनों के बीच क्‍या अंतर है, इसके बारे में हम आपको बता रहे हैं।

 

एचआईवी वायरस है और एड्स बीमारी

एचआईवी मतलब ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस, जो कि एक वायरस है। एड्स, पूरा नाम एक्वायर्ड इम्‍यूनो-डिफिशिएंसी सिंड्रोम, एक मेडिकल सिंड्रोम है। एचआईवी वायरस प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं पर हमला करता है जबकि एड्स, एचआईवी संक्रमण के बाद सिंड्रोम के रुप में प्रकट होती है।

 

एचआईवी संक्रमित होने का मतलब एड्स नहीं

एक व्यक्ति अगर एचआईवी संक्रमित है तो जरूरी नहीं कि उसे एड्स हो। एचआईवी से संक्रमित अधिकतर व्यक्ति प्रोपर मेडिकेशन टर्म्स फॉलो कर सामान्य जिंदगी जी सकते हैं। इसका मतलब ये नहीं की सभी एचआईवी संक्रमित लोगों को एड्स नहीं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को एड्स हो सकता है लेकिन हर एड्स से पीड़ित लोग जरूरी नहीं कि एचआईवी से संक्रमित हों।

बिना प्रोटेक्‍शन दो एड्स पीड़ित कर सकते हैं सेक्‍स

बिल्कुल नहीं। दो एड्स पीडि़त आराम से बिना प्रोटेक्‍शन के सेक्‍स नहीं कर सकते हैं। ये उनके लिए खतरनाक हो सकता है। एड्स भी कई तरह के होते हैं। साथ ही कोई एड्स से पीड़ित हो सकता है और कोई एचआईवी संक्रमित एड्स से पीड़ित हो सकता है। वहीं किसी एड्स पीडि‍त को सीडी4 का कांउट ड्रॉप 200 होता है और किसी को संक्रमण या कैंसर होता है। ऐसे में प्रोटेक्शन के साथ ही सेक्स करें।

 

एचआईवी ट्रांसमिट होता है, एड्स नहीं

एचआईवी एक इंसान से दूसरे इंसान में ट्रांसमिट हो सकता है लेकिन एड्स नहीं। जबकि अधिकतर लोग बोलते हैं, “मुझे एड्स मत दो”। इंटरकोर्स, संक्रमित खून और इंजेक्शन से एचआईवी ट्रांसमिट होता है ना कि एड्स।

 

एचआईवी टेस्ट सिम्पल से कर सकते हैं

सिम्पल ब्लड टस्ट और स्लाइवा टेस्ट से एचआईवी संक्रमण का पता किया जा सकता है। साथ ही ये टेस्ट कुछ हफ्तों के बाद ही पता लग पाता है। इसे दूसरी तरह से भी पता किया जा सकता है। बॉडी में मौजूद एंटीजन्स का भी टेस्ट कर पता किया जा सकता है

 

एड्स टेस्ट कॉम्पलीकेटेड है

जब एचआईवी वायरस इम्यूनिटी सिस्टम को कमजोर कर देता है तब इंसान को एड्स होता है। इम्युन सेल्स को काउंट कर एड्स का पता किया जाता है। इस टेस्ट को सीडी4 सेल्स टेस्ट कहते हैं।

 

ट्रीटमेंट और उम्मीद में अंतर

एचआईवी को कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें इंसान के अधिक जीने के चांसेस होते हैं। लेकिन एड्स में ऐसा नहीं है। एड्स में इम्युन सिस्टम डैमेज होता है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता।

 

Ref:-onlymyhealth.com

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