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गुजरात के चुनाव नतीजों पर भारत के आलवा चीन और बहुत सारे दशों की भी पैनी नज़र

एक अखबार ने एक संपादकीय प्रकाशित किया है, जिसमें लिखा है कि साल 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी 13 सालों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ऐसे में बीजेपी गुजरात चुनाव जीतने की हरसंभव कोशिश कर रही है. इस संपादकीय में लिखा है कि बीजेपी ने देश में विकास को आंकने के लिए गुजरात मॉडल का उदाहरण दिया था.

हाल ही में संपन्न हुए गुजरात चुनाव के नतीजों पर भारत ही नहीं, बल्कि चीन जैसे पड़ोसी देशों की भी नजरें टिकी हैं. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीनी ऑब्जर्वरों का मानना है कि यह चुनाव पीएम मोदी के एजेंडे और अब तक किए काम का लिटमस टेस्ट है.अखबार ने लिखा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ रही आर्थिक भागीदारी के बीच भारत की अर्थव्यवस्था में होने वाला बदलाव चीन के लिए चिंता का विषय है.संपादकीय में लिखा है कि इन सुधारों का विपक्ष और कई अर्थशास्त्रियों ने जमकर विरोध किया था. इस चुनाव में पीएम मोदी के आर्थिक सुधार और अन्य सुधारवादी एजेंडे को लेकर लोगों की राय के बारे में पता चलेगा.इस लेख में लिखा है कि यह बीजेपी यह चुनाव हार जाती है तो यह पीएम के आर्थिक सुधारों के लिए बहुत बड़ा झटका होगा. इस लेख में यह भी लिखा है कि अगर बीजेपी चुनाव जीत जाती है लेकिन वोट शेयर में कमी आती है तो यह बीजेपी के लिए खतरे की घंटी होगी. अखबार के मुताबिक, वोट शेयर में कमी या बीजेपी की हार का सीधा मतलब यही होगा कि देश के लोग उनके आर्थिक सुधारों से खुश नहीं हैं और उनके सुधारों में कमियां हैं.आखिर में इस आर्टिकल में लिखा है कि चीन को गुजरात चुनाव पर पैनी नजर रखनी चाहिए. इसके साथ ही भारत में बिजनेस कर रही कंपनियों को चुनावी नतीजों के बाद बड़े आर्थिक बदलाव के लिए तैयार रहने की हिदायत दी गई है.

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