army
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एक कविता इंडियन army को समर्पीत

मेरे घर के आंगन में
मायूसी ना छा जाए
हवाओ से ये कह दो तुम
मेरे घर पे खबर न पहुँचाय
उम्मीद उस घरौंदे की
टूट कर भी टूटे ना

जाते जाते एक ख्वाहिस है
मेरा देश कभी मुझे भुलेना।

बिटिया मेरी जब पूछेगी
मेरे पिताजी आए हैं??
इस बार भी क्या मेरे लिए
खेल खिलौने लाए है
उसकी बचकानी बातो को
तुम कहके कुछ फुसला लेना

जाते जाते एक ख्वाहिस है
मेरा देश कभी मुझे भुलेना

पर सोचता हूं मेरी माँ से
तुम नज़रे कैसे मिलओगे
अब जिगर का टुकड़ा नही रहा
यह खबर कैसे बताओगे
मंदिर में एक दीया होगी
उसको तुम बुझा देना

जाते जाते एक ख्वाहिस है
मेरा देश कभी मुझे भुलेना।

घर के किसी कोने में
दुल्हन भी खड़ी होगी
अब तो ना ही कंगन होगा
और मांग भी सुनी होगी….
तुम कह देना उस सिंहनी से
डर उसको कभी सताये ना

जाते जाते एक ख्वाहिस है
मेरा देश कभी मुझे भुलेना

जय हिंद

 

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