Madan Mohan Malaviya
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  • Pandit Madan Mohan Malaviya ji का जन्‍म 25 दिसंबर 1861 को इलाहाबाद के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था ,उस समय इलाहाबाद को प्रयाग के नाम से जानते थे.

  • पं मदनमोहन मालवीय भारत के अन्तिम व्यक्ति थे जिसे महामना की उपाधि दी गयी थी

  • पं मदनमोहन मालवीय ने ही 1916 में बीएचयू(बनारस हिन्दू यूनिवरसिटि) की स्थापना की थी

  • उनके पिता पण्डित ब्रजनाथ जी संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान थे| वे श्रीमद्भागवत गीता की कथा सुनाकर अपनी  जीविका चलाते थे

  • मदनमोहन मालवीय जी का विवाह 16 वर्ष की उम्र में मीरजापुर के पं. नन्दलाल जी की पुत्री कुन्दन देवी के साथ हुआ था

  • मालवीयजी को सत्य, दया और न्याय पर आधारित हिन्दू सनातन धर्म सबसे अधिक प्रिय था।

  • डॉ. राधा कृष्णन ने पं मदनमोहन मालवीय जी को संघर्ष और परिश्रम के कारण उन्हें कर्मयोगी बोला था.

  • पं मदनमोहन मालवीय जी चार बार 1909, 1918, 1930, 1932 में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे थे.

  • अग्रेज़ी सरकार ने पं मदनमोहन मालवीय जी को वर्ष 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के समय धारा 144 के उल्लंघन करने के कारण गिरफ्तार कर लिया था

  • 1919 से 1938 तक पं मदनमोहन मालवीय जी बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर भी रह चुके थे और साथ ही 1905 में हरिद्वार में हुई गंगा महासभा के वे संस्थापक भी थे

  • “सिर जाय तो जाय प्रभु  मेरो धर्म न जाय पं मदनमोहन मालवीय जी का जीवन धर्म था और वो इस सिधान्त को मानते थे

  • पं मदनमोहन मालवीय जी ने रथयात्रा के मौके पर कलाराम मंदिर में दलितों को प्रवेश दिलाया था और गोदावरी नदी में हिंदू मंत्र का जाप करते हुए स्नान के लिए भी प्रेरित किया था.

  • पं मदनमोहन मालवीय जी को बचपन मे ही पिता ब्रजनाथ जी की भागवत-कथा से धर्म-प्रचार एवं माता मूनादेवी से गरीबो और दुखियों की सेवा करने का स्वभाव प्राप्त हुआ था

  • पं मदनमोहन मालवीय जी को वर्ष 2014 में भारत के सर्वोच्‍च सम्‍मान भारत रत्‍न से सम्‍मानित किया गया था

  • पं मदनमोहन मालवीय जी का निधन 85 वर्ष की अवस्‍था में 12 नवंबर 1946 को हुआ था

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