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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, निर्भया गैंगरेप के दोसियों को सुनने के लिए हमने हिमालय जैसा कठोरता दिखाया

निर्भया गैंगरेप की पांचवी बरसी से ठीक पहले दोषी मुकेश की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कठोर टिप्पणी की है.

नई दिल्ली/भारत: निर्भया गैंगरेप की पांचवी बरसी से ठीक पहले दोषी मुकेश की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कठोर टिप्पणी की है| जज ने कहा कि हमने दोषी मुकेश के वकील की ओर से दी गई दलीलों को हिमालय जैसे सब्र के साथ सुना| दोषी मुकेश के वकील ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने दबाव बनाकर सीआरपीसी 313 के तहत उनके मुवक्किल का बयान दर्ज कराया था, जिसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि अगर आपकी दलील को मान लें तब तो ऐसे देश में कोई भी ट्रॉयल नहीं चल पाएगा|इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषी मुकेश के दांतों के निशान पीड़िता के शरीर पर मिले थे, उसे कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में उसकी तरफ से इतने सबूत पेश किए गए हैं, जिसके बाद यह मामला पुनर्विचार का बनता ही नहीं है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय के लिए 10 दिनों के भीतर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की इजाजत दे दी है.

दोषी मुकेश की दलील पर पुलिस ने दिया ये तर्क
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक दोषी मुकेश के वकील ने जब कहा कि उसके मुवक्किल से सीआरपीसी 313 के तहत दबाव में बयान दर्ज कराया गया है तो दिल्ली पुलिस ने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं. पुलिस ने कहा कि अगर दोषी को प्रताड़ित करके बयान दर्ज कराए गए हैं तो उन्होंने तिहाड़ जेल प्रशासन या निचली अदालत में ये बात क्यों नहीं बताई गई. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई 22 जनवरी को करेगा.

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